संकटनाशन गणेश स्तोत्र | Ganpati Stotra / Ganesh Stotram Sankat Nashan Stotram in Hindi | English

Ganpati Stotra: इस लेख मे हम बात कर रहे है। Ganpati Stotra की इसमें हम बतायेगे की हम किस प्रकार से vinayaka Stotram का उच्चारण कर सकते है और Ganesh Stotram Sankat Nashan Stotram का जाप किस समय पर करना चाहिए और किस प्रकार से करना चाहिए।

Ganpati Stotra
Ganpati Stotra

किस वक्त करें गणेश स्तोत्र का जाप

घर की शांति और उत्तम प्रकार प्रगति पाने के लिए गणपति मूर्ति या चित्र के सामने गणेश स्तोत्र का जाप करना चाहिए। यह मंगलवार के दिन सुबह करने पर उत्तम लाभ प्राप्त होगा।

Ganpati Stotra का पाठ कैसे करें?

  • मंगलवार के दिन गणेश स्तोत्र का पाठ करना उत्तम होता है।
  • चटाई पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पैरों को मोड़कर बैठ जाएं।
  • पानी की सहायता से साफ फर्श पर या पाटे पर स्वास्तिक बनाएं। तांबे के गिलास में थोड़ा पानी लेकर उसके ऊपर रख दें।
  • अपने आराम के आधार पर आप गणेश स्तोत्र का 5/7/11/51/108 बार पाठ कर सकते हैं।
  • भगवान गणेश को धन्यवाद और फिर परिवार में सभी को तीर्थ के रूप में तांबे के गिलास में पानी परोसें।
  • आप पूरे घर में तीर्थ का छिड़काव भी कर सकते हैं।

(संकटनाशन गणेशस्तोत्रम)

ॐ श्री गणेशाय नमः
|| नारद उवाच ||
प्रणम्य शिरसा देवं गौरींपुत्रं  विनायकम् |
भक्तावासं स्मरे न्नित्यंमायुः कामार्थसिद्धये || 1

प्रथमम् वक्रतुण्डम् च एकदन्तम् द्वितीयकम् |
तृतीयम् कृष्ण पिंगक्षम् च गजवक्त्रं चतुर्थकम् || 2 ||

लंबोदरम् पंचमं च षष्ठम विकटमेव च |
सप्तमं विघ्नराजेंद्रम् च धूम्रवर्णम् तथाष्टमम || 3 ||

नवमं भालचंद्रम् च दशमं तु विनायकम् |
एकादशम् गणपतिम् द्वादशम् तु गजाननम् || 4 ||

द्वादशएतानि नामानि त्रिसंध्यम यः पठेन्नरः |
न च विघ्नभ्यम् तस्य सर्वसिद्धि करं प्रभो || 5 ||

विध्यार्थी लभते विद्याम धनार्थी लभते धनम् |
पुत्रार्थी लभते पुत्रान मोक्षार्थी लभते गतिम् || 6 ||

जपेद गणपति स्तोत्रम् षडभिमासैः फलम् लभते |
संवत्सरेण सिद्धि चं लभते नात्र संशयः || 7 ||

अष्टाभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां यः समर्पयेत |
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः || 8 ||
|| इति श्री नारदपुराणे संकष्टनाशनं स्त्रोत्रम् सम्पूर्णम् ||

Ganpati Stotra / Ganesh Stotra lyrics in English

Om Shri Ganeshay Namah 
|| Narad Uvaach || 
Pranamya shirasa devam Gauri putram Vinayakam ।
Bhakthavasam smaretrityamayuh kama artha sidhaye ॥1॥

Prathamam Vakratundam cha, Ekadantam dwitiyakam ।
Tritiyam Krushna Pingaksham, Gajavaktram Chaturthakam ॥2॥

Lambodaram Panchamam cha, Sashtam Vikatamev cha ।
Saptamam Vignarajam cha, Dhoomravarnam tathashtamam ॥3॥

Navamam Bhalchandram cha, Dashamam tu Vinayakam ।
Ekadasham Ganapatim, Dwadasham tu Gajananam ॥4॥

Dwadasaithani namani, Trisandhyam yah pathenara ।
Na cha vighna bhayam tasya, Sarvsiddhi karam param ॥5॥

Vidhyarthi labhate Vidhyam, Danarthi labhate Dhanam ।
Putrarthi labhate Putran, Moksharthi labhate Gateem ॥6॥

Japet Ganapati stotram, Shadbhirmasai phalam labheth ।
Samvatsarena sidhim cha, Labhate natra sanshaya ॥7॥

Ashtabhyo Brahmoyashr Likihitwa yh samarpayet ।
Tasya Vidhya bhavetsarva Ganeshasya Prasadatah ॥8॥

॥ Iti Shri Narad Purane Sankat nashanam Ganesha Stotram Sampurnam ॥

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