Mangal Panday Biography | Martyrs Day 2024: मंगल पांडे बलिदान दिवस कब मनाया जाता है? जीवन परिचय

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Mangal Panday Martyrs Day: देश किसी एक व्यक्ति से आजादी नहीं पायी देश को अंग्रेजो से आजादी दिलाने के लिए कई वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी और इनकी शहादत के लिए शहीदी दिवस और बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी के साथ आज हम बात करेंगे मंगल पांडे बलिदान दिवस के बारे में ताकि महान लोगो को हम याद कर सके। यहां से हम अध्ययन करेंगे कि मंगल पांडे कौन थे और उन्होंने क्या किया।

Mangal Panday Biography | Martyrs Day
Mangal Panday Biography | Martyrs Day

आज के इस लेख में हम बात करेंगे Mangal Panday की जीवनी की और मंगल पांडे बलिदान दिवस के बारे में इस लेख को अंत तक पढ़े ताकि हमे महान व्यक्तियों के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है।

भारत माता को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में 1857 की क्रांति को याद किया जाता है और 1857 की ज्वाला को भड़काने वाले क्रांतिवीर मंगल पांडे थे जिन्होंने पहली बार अंग्रेजों का विरोध किया।

कौन थे मंगल पांडे:

जन्म:मंगल पांडे , (जन्म 19 जुलाई, 1827, अकबरपुर)
जन्म स्थान:उत्तर प्रदेश के ऊपरी बलिया जिले के एक गाँव नगवा
जातिब्राह्मण
शहीद8 अप्रैल, 1857, बैरकपुर

मंगल पांडे भारतीय इतिहास में एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रसिद्ध हैं जिन्होंने देश को ब्रिटिश राज से मुक्त कराने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

उन्होंने 1857 के विद्रोह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे 1857 के एक सिपाही विद्रोह के रूप में भी जाना जाता है। वह व्यापक रूप से भारत में इसके पहले स्वतंत्रता सेनानियों में से एक के रूप में जाने जाते हैं।

Mangal Pandey History /1857 का विद्रोह क्यों हुआ था:

जैसा की आपने ऊपर मंगल पांडेय का जन्म और जन्म स्थान के बारे में इस लेख में शार्ट लेख में बातएंगे की कौन थे मंगल पांडये 1849 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए वह 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री की छठी कंपनी में शामिल हुए, जिसमें एक सैनिक (सिपाही) के रूप में बड़ी संख्या में ब्राह्मण शामिल थे। मंगल पांडे एक देश भक्त होने के साथ साथ एक बहुत अधिक महत्वाकांशी थे।

हालाँकि, पांडे की व्यावसायिक आकांक्षाएँ उनके धार्मिक विश्वासों से टकरा गईं। 1850 के दशक के मध्य में, जब वह बैरकपुर गैरीसन में तैनात थे, भारत में एक नई एनफील्ड राइफल अंग्रेजो के द्वारा पेश की गई, जिसने एक सैनिक को ग्रीस किए गए कारतूसों के सिरों को काटकर हथियार लोड करने की अनुमति दी। और उन कारतूसों को दाँतो की सहायता से काटा जाता था।  एक अफवाह फैल गई कि इस्तेमाल किया जाने वाला स्नेहक या तो गाय या सुअर का चरबी था, जिसे क्रमशः हिंदू और मुसलमान नापसंद करते थे। और इनको धार्मिक ठेश पहुंचने के साथ साथ सिपाहियों को यह विश्वास हो गया था कि अंग्रेजों ने कारतूसों पर जान-बूझकर इस प्रकार का बनाया जा रहा है।

मंगल पांडे की गिरफ्तारी:

मंगल पांडे के द्व्रारा सैनिको और विद्रोईयो भड़काने की बात जब रेजीमेंट मेजर ह्यूजेसन के लिए कुछ सैनिकों को भेजा लेकिन जब एक लेफ्टिनेंट घोड़े पर बैठकर उन्हें पकड़ने आया तो उन्होंने उस पर गोली चला दी, लेकिन लेफ्टिनेंट गोली से बचते हुआ घोड़े से कूद गया था और इसके बाद मंगल पांडे उस पर तलवार की सहायता से हमला किया और सहायता के लिए दुसरे ब्रिटिश अधिकारी आए तो मंगल पांडे ने उन्हें भी मार दिया।

जब ईश्वरी प्रसाद समेत सभी सिपाहियों ने उन्हें गिरफ्तार करने से मना कर दिया तब बाद में अंग्रेजी सैनिक उन्हें गिरफ्तार करने आगे आये तब मगल पांड्य से ने इसका खुलकर विरोध करने के लिए कहाँ लकिन कोई भी भारतीय सैनिक आगे नहीं आया तब उन्होंने पैरो में पड़ी बदूक से  निशाना लगाकर गोली चलाई पैर के अंगूठे से ट्रिगर दबाया जिसमें मंगल पांडे के कपड़े जल गए। जहाँ उन्हें गिरफ्तार करके उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया।

मंगल पांडे बलिदान/शहीदी दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? (Mangal Pandey Martyrs Day):

29 मार्च, 1857 की घटनाओं को विभिन्न प्रकार से परिभाषित किया गया है। पांडे ने अपने साथी सिपाहियों को अपने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ उठने के लिए उकसाने की कोशिश की, उनमें से दो पर हमला किया, संयमित होने के बाद खुद को गोली मारने का प्रयास किया, और अंततः लोकप्रिय समझौते के अनुसार अभिभूत और गिरफ्तार कर लिया गया।

मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को फाँसी पर लटका दिया गया था क्योंकि जल्द ही उन पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। उनका फांसी द्वारा मूल रूप से 18 अप्रैल के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे 8 अप्रैल कर दिया गया दिया क्योंकि उन्हें डर था कि अगर वे तब तक इंतजार करते हैं तो बड़े पैमाने पर विद्रोह होगा। उस महीने के अंत में, मेरठ में, एनफील्ड कारतूसों के उपयोग के विरोध में एक विद्रोह छिड़ गया, जिसके कारण मई में बड़े विद्रोह की शुरुआत हुई।

मंगल पांडे को भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया जाता है। 1984 में, भारत सरकार ने उनके चित्र के साथ एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। और तभी से मंगल पांडे दिवस मनाया जाता है इसके अलावा, 2005 में उनके जीवन के बारे में एक फिल्म और एक मंच नाटक जारी किया गया था।

मंगल पांडे कौन थे?

मंगल पांडे स्वतंत्रता सैनानी थे जिनका जन्म 19 जुलाई, 1827, अकबरपुर हुआ और 8 अप्रैल, 1857, बैरकपुर में फांसी की सजा दी गयी।

मंगल पांडे को क्यों दी गई फांसी?

29 मार्च 1857 को, 34वीं रेजीमेंट बटालियन के एक भारतीय सिपाही मंगल पांडे ने कलकत्ता के पास बैरकपुर में दो ब्रिटिश अधिकारियों – ह्यूजेसन और बाऊ को मार दिया था। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, और 08 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई।

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