श्री राम रामेति | Shri Ram Raameti Ram Raksha Stotram

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Ram Raksha Stotram:- पुराणों में कहा गया है कि श्री राम राम रमेति रामे रामे मनोरमे सहस्रनाम तातुल्यं राम नाम वारणणे विष्णु सहस्रनाम करने की वही शक्ति और लाभ देते है। जिस प्रकार भगवान् वेद निरस्त समस्तपुंदोषशंकापंककलंकावकाश तथा भगवन्निश्वास होने से भ्रम, प्रमाद, विप्रलिप्सा, करणापाटव आदि दूषणों से सर्वथा दूर तथा भगवान् की सत्ता में परमप्रमाण और भगवद्रूप ही हैं उसी प्रकार वेदार्थ के उपबृंहण रूप पुराण, संहिता एवं रामायण, महाभारत में कहे हुए मंत्रद्रष्टा महर्षियों के वाक्य भी वेद ही भाँति परम प्रामाणिक हैं।

राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने ॥

इस मंत्र को श्री राम तारक मंत्र भी कहा जाता है। और इसका जाप, सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु के 1000 नामों के जाप के समतुल्य है। यह मंत्र श्रीरामरक्षास्तोत्रम् के नाम से भी जाना जाता है।

Shri Ram Raameti RamRaksha Stotram

श्री राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे
श्री राम राम रामेति, रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, श्री राम-नाम वरानने ॥

Ram Raksha Stotram

अर्थ :- पार्वती जी से भगवान शिव कहते हैं – श्रीराम नाम के मुख में विराजमान होने से राम, राम, राम इसी द्वादशाक्षर नाम का जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति इन तीनों अवस्थाओं में जप करो। हे पार्वति! मैं भी इन्हीं मनोरम राम में रमता रहता हूँ। यह राम नाम विष्णु सहस्रनाम के तुल्य है। भगवान् राम के ”राम” नाम को विष्णुसहस्रनाम के तुल्य कहा गया है।
रामरक्षा स्तोत्र |

Ram Raksha Stotram in English

Ram Raameti Raameti, Rame Raame Manorame ।
Sahasra-Nama Tat-Tulyam, Raama-Naama Varanane ॥

कथा स्वरूप:-
एक बार भगवान शिव ने अपनी प्राणवल्लभा पार्वती जी से अपने ही साथ भोजन करने का अनुरोध किया। भगवती पार्वती जी ने यह कहकर टाला कि वे विष्णुसहस्रनाम का पाठ कर रही हैं। थोड़ी देर तक प्रतीक्षा करके शिवजी ने जब पुनः पार्वती जी को बुलाया तब भी पार्वती जी ने यही उत्तर दिया कि वे विष्णुसहस्रनाम के पाठ के विश्राम के पश्चात् ही आ सकेंगी। शिव जी को शीघ्रता थी। भोजन ठण्डा हो रहा था। अतः भगवान भूतभावन ने कहा- पार्वति! राम राम कहो। एक बार राम कहने से विष्णुसहस्रनाम का सम्पूर्ण फल मिल जाता है। क्योंकि श्रीराम नाम ही विष्णु सहस्रनाम के तुल्य है। इस प्रकार शिवजी के मुख से राम इस दो अक्षर के नाम का विष्णुसहस्रनाम के समान सुनकर राम इस द्व्यक्षर नाम का जप करके पार्वती जी ने प्रसन्न होकर शिवजी के साथ भोजन किया।

सहस नाम सम सुनि शिव बानी। जपि जेई* पिय संग भवानी॥ – मानस १-१९-६
1. जेई: भोजन करना।

राम बीज मंत्र क्या है?

जीवन में हर प्रकार के सुख और एश्वर्य की प्राप्ति हेतु इस बीज मंत्र द्वारा भगवान श्री विष्णु की आराधना करनी चाहिए। भगवान श्री राम का बीज मंत्र “रीं” है। रीं रामाय नमः।

सौभाग्य और सुख की प्राप्ति के लिए श्री राम मंत्र क्या है?

श्री रामचन्द्राय नमः । ३. राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्त्र नाम तत्तुन्यं राम नाम वरानने ।।

16 राम नाम जपने से क्या लाभ है?

श्री राम शरणम् श्री राम पार्क में चल रहे राम नाम अखंड जाप महायज्ञ के 16वें दिन संत नरकेवल बेदी जी ने कहा कि राम नाम जपने से सभी प्रकार के दुख, दर्द और कठिनाइयां श्रीराम कृपा से अपने आप दूर हो जाया करती हैं। जैसे तेज हवा चलने से बादल भाग जाते हैं, वैसे ही राम नाम का जाप घबराहट को दूर कर देता है।

राम रामाय नमः का कितना जाप करना चाहिए?

श्रीराम के इस सिद्ध मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए।

भगवान राम को कैसे खुश करें?

ओम, मुझे दशरथ के पुत्र (जिसके पास 10 रथ हैं) का ध्यान करने दो, ओह, सीता की पत्नी, मुझे उच्च बुद्धि दो, और भगवान राम को मेरे मन को रोशन करने दो।

भगवान राम को कौन सा फल पसंद है?

सीताफल या शरीफा शरद और शीत ऋतु में मिलने वाला एक गुणकारी फल है।

भगवान राम की उम्र कितने वर्ष की थी?

श्रीराम पृथ्वी पर 11 हजार वर्षों तक रहे, इतने वर्षों में उन्‍होंने असंख्‍य दुष्‍टों का संहार किया।

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