सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् | Siddha Kunjika Stotram

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Siddh Kunjika Stotram:- यदि आप देवी भगवती अर्थात मां दुर्गा की असीम कृपा पाना चाहते हैं तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को परम कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से मनुष्य को चमत्मकारिक रूप से कष्टों से मुक्ति मिलती है। धर्म ग्रंथों में ये कहा जाता है कि यदि किसी ने 108 दिन तक लगातार इस मंत्र का जाप कर लिया तो ये सिद्ध हो जाता है और उस व्यक्ति को सम्पूर्ण सुख और साधन प्राप्त हो जाते हैं।

Shri Chandi Dhwaj Stotram
Siddha Kunjika Stotram

|| Siddha Kunjika Stotram ||

॥ दुर्गा सप्तशती: सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥
शिव उवाच:

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत ॥1॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥2॥
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।

अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥3॥
गोपनीयं प्रयत्‍‌नेनस्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यंस्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत्कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥4॥

॥ अथ मन्त्रः ॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लींचामुण्डायै विच्चे ॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालयज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वलहं सं लं क्षं फट् स्वाहा ॥

इति मन्त्रः ॥
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि ।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥1॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि ।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे ॥2॥

ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ॥3॥
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि ॥4॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्‍‌नी वां वीं वूं वागधीश्‍वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥5॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥6॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं ।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥7॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे ॥8॥

॥ Durga Saptashati: Siddhakunjikastotram In English ॥

Shiva Uvach:
Shrunu Devi Pravakshyami, Kunjikastotramuttamam ।
Yen Mantra Prabandh Chandijap: Shubho Bhavet ॥ 1 ॥
Na Kavachan Nargalastotran Kilakam N Rahshyakam ।
Na Sooktan Napi Dhyanan Ch Na Nyaso Na Ch Varchanam ॥ 2 ॥

Kunjikapathamatren Durgapathaphalam Labhet ।
Ati Guhayataran Devi Devanampi Rarekam ॥ 3 ॥
Gopaniyan Prayat‍‌nenasvayoniriv Parvati ।
Maranam Mohanam Vyasastambhochnathatadikam ।
Pathmatren Sanskidhyetkunjikastotramuttamam ॥ 4 ॥

॥ Ath Mantrah ॥
Om Ain Hrin Klinchamundayai Vichche ॥
Om Glaun Hun Klin Joon Sah Jvalayajvalay Jval Jval Prajval Prajval
Ain Hrin Klin Chamundayai Vichche Jvalahan San Lan Kshan Phat Svaha ॥

॥ Iti Mantrah ॥
Namaste Roodraroopinyai Namaste Madhumardini ।
Namah Kaitabhaharinyai Namaste Mahishardini ॥ 1 ॥
Namaste Shumbhahantryai Ch Nishumbhasuraghatini ।
Jagratan Hi Mahadevi Japan Siddhan Kurooshv Me ॥ 2 ॥

Ainkari Srshtiroopayai Hrinkari Pratipalika ।
Klinkari Kamaroopinyai Bijaroope Namostu Te ॥ 3 ॥
Chamunda Chandaghati Ch Yaikari Varadayini ।
Vichche Chabhayada Nityan Namaste Mantraroopini ॥ 4 ॥

Dhan Dhin Dhoon Dhoorjateh Pat‍‌ni Van Vin Voon Vagadhish‍vari ।
Kran Krin Kroon Kalika Devi Shan Shin Shoon Me Shubhan Kuru ॥ 5 ॥
Hun Hun Hunkararoopinyai Jan Jan Jan Jambhanadini ।
Bhran Bhrin Bhroon Bhairavi Bhadre Bhavanyai Te Namo Namah ॥ 6 ॥

An Kan Chan Tan Tan Pan Yan Shan Vin Dun Ain Vin Han Kshan ।
Dhijagran Dhijagran Trotay Trotay Diptan Kuru Kuru Svaha ॥ 7 ॥
Pan Pin Poon Parvati Poorna Khan Khin Khoon Khechari Tatha ।
San Sin Soon Saptashati Devya Mantrasiddhin Kurushv Me ॥ 8 ॥

Idan Tu Kunjikastotramantrajagartihatave ।
Abhakte Naiv Datavyangopitan Raksh Parvati ॥
Yastu Kunjikaya Devihinam Saptashati Pathet ।
Na Tasy Jayatesiddhiraranye Rodanan Yatha ॥
Iti Srirudrayamale Gauritantre Shivaparvatisamvade Kunjikastotram Sampoornam ॥

Siddha Kunjika Stotram

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