Vid Dhatu Roop in Sanskrit | अदादिगण तथा परस्मैपदी धातु रूप

Join Our WhatsApp Channel Join Now
Join Our Telegram Channel Join Now

नमस्कार दोस्तों, हम यहाँ पर आपके लिए संस्कृत धातु रूप से बने Vid Dhatu Roop in Sanskrit को लेकर प्रस्तुत हुए है। संस्कृत भाषा में वाक्य का निर्माण करने के लिए धातु के रूप बनते है। वाक्य के लिए एक धातु के कई रूप हो सकते है। विद् धातु का अर्थ है ‘रहना, to exist’। यह दिवादिगण तथा आत्मनेपदी धातु है। सभी दिवादिगण धातु के धातु रूप इसी प्रकार बनते है जैसे- क्रुध्, दिव्, विद्, नश्, जन्, शम्, नृत्, सिव् आदि। Vid Dhatu Roop संस्कृत में सभी पुरुष एवं वचनों में नीचे दिए गए हैं।

Vid Dhatu Roop in Sanskrit

1 . लट् लकार – वर्तमान काल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषविद्यतेविद्येतेविद्यन्ते
मध्यम पुरुषविद्यसेविद्येथेविद्यध्वे
उत्तम पुरुषविद्येविद्यावहेविद्यामहे
Vid Dhatu Roop

2. लृट् लकार – भविष्यत काल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवेत्स्यतेवेत्स्येतेवेत्स्यन्ते
मध्यम पुरुषवेत्स्यसेवेत्स्येथेवेत्स्यध्वे
उत्तम पुरुषवेत्स्येवेत्स्यावहेवेत्स्यामहे
Vid Dhatu Roop

3. लङ् लकार – भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअविद्यतअविद्येताम्अविद्यन्त
मध्यम पुरुषअविद्यथाःअविद्येथाम्अविद्यध्वम्
उत्तम पुरुषअविद्येअविद्यावहिअविद्यामहि

4. लोट् लकार – आज्ञा के अर्थ में

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषविद्यताम्विद्येताम्विद्ययन्ताम्
मध्यम पुरुषविद्यस्वविद्येथाम्विद्यध्वम्
उत्तम पुरुषविद्यैविद्यावहैविद्यामहै

5. विधिलिङ् लकार – चाहिए के अर्थ में

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषविद्येतविद्येयाताम्विद्येरन्
मध्यम पुरुषविद्येथाःविद्येयाथाम्विद्येध्वम्
उत्तम पुरुषविद्येयविद्येवहिविद्येमहि

6. लुङ् लकार – सामान्य भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअवित्तअवित्साताम्अवित्सत
मध्यम पुरुषअवित्थाःअवित्साथाम्अविद्ध्वम्
उत्तम पुरुषअवित्सिअवित्स्वहिअवित्स्महि

7. लिट् लकार – परोक्ष भूतकाल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषविविदेविविदातेविविदिरे
मध्यम पुरुषविविदिषेविविदाथेविविदिध्वे
उत्तम पुरुषविविदेविविदिवहेविविदिमहे

8. लुट् लकार – अनद्यतन भविष्य काल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवेत्तावेत्तारौवेत्तार:
मध्यम पुरुषवेत्तासेवेत्तासाथेवेत्ताध्वे
उत्तम पुरुषवेत्ताहेवेत्तास्वहेवेत्तास्महे

9. आशिर्लिङ् लकार – आशीर्वाद हेतु

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषवित्सीष्टवित्सीयास्ताम्वित्सीरन्
मध्यम पुरुषवित्सीष्ठाःवित्सीयास्थाम्वित्सीध्वम्
उत्तम पुरुषवित्सीयवित्सीवहिवित्सीमहि

10. लृङ् लकार – हेतुहेतुमद् भविष्य काल

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषअवेत्स्यतअवेत्स्येताम्अवेत्स्यन्त
मध्यम पुरुषअवेत्स्यथाःअवेत्स्येथाम्अवेत्स्यध्वम्
उत्तम पुरुषअवेत्स्येअवेत्स्यावहिअवेत्स्यामहि

आपको यह लेख (पोस्ट) कैंसा लगा? हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य बताएँ। gk-help.com पर हमारी टीम शीघ्र ही आपके कमेंट का जवाब देगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top