Ganesh Chaturthi 2023 का विशेष महत्व | Ganesh Puja विधि | विभिन्न प्रकार की आरती

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Ganesh Chaturthi का विशेष महत्व: हेलो दोस्तों इस लेख में हम श्री गणेश जी भगवान के बारे में जानेगे। और उनके परिवार के बारे में जानेगे और एक कहानी के आधार पर समझेंगे की क्यों गणेश जी की प्रथम पूजा की जाती है।
हिंदू धर्म में देवता और उससे जुड़े नियमों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान गणेश की पूजा के लिए बुधवार का दिन निर्धारित किया गया है। भगवान गणेश, परेशानियों और पीड़ा को कम करने वाले है अगर भगवान गणेश की पूरी भक्ति और विश्वास के साथ पूजा की जाती है तो जीवन की परेशानियों और समस्याओं का भी समाधान होता है गणपति बप्पा हर बुधवार को भगवान श्री गणेश की मूर्ति की पूजा के दौरान उन्हें मोदक और दूर्वा अर्पित करने से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

Ganesh Chaturthi
Ganesh Chaturthi

गणपति जी की शुद्ध मन से पूजा करें ताकि आपको उनका पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो सके। आइए जानते हैं उन मंत्रों के बारे में जिनका हर बुधवार को जाप करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।
गणेश चतुर्थी कब है (Ganesh Chaturthi Kab Hai in 2023) और इसका क्या महत्व है गणेश जी के जन्म की कथा, गणेश जी का परिवार, उनके विवाह की दिलचस्प कथा, गणेश पूजा मंत्र, आरती गणेश चतुर्थी के ग्यारह दिनों का महत्व, गणेश चतुर्थी की पूजा विधि तथा गणेश चतुर्थी कब (Ganesh Chaturthi Kab Hai) है| यह सभी जानकारी को इस पोस्ट में विस्तार से दिया गया है

भाद्रपद या भाद्रो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन से इस उत्सव की शुरुआत होती है और अनंत चतुर्दशी पर इसका समापन होता है। भगवान गणेश को समर्पित यह त्योहार गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

भगवान गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि 18 सितंबर 2023 को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगी और 19 सितंबर को दोपहर 01 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। गणेश स्थापना या पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। मुहूर्त की कुल अवधि 02 घंटे 27 मिनट की है। इस साल गणेश विसर्जन 28 सितंबर 2023, गुरुवार को किया जाएगा।

भूलकर भी न करें चंद्रदर्शन

शास्त्रों के अनुसार, चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए। अगर चंद्रमा को देख लिया को झूठा कलंक लग सकता है। ठीक उसी तरह से जिस तरह से भगवान श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि चुराने का लगा था। कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति ने भूलवश चंद्रदर्शन कर लिया हो कृष्ण स्यमंतक कथा को पढ़ने या सुनने से भगवान गणेश क्षमा कर देते हैं।

इस समय न करें चंद्रदर्शन

एक दिन पूर्व, वर्जित चंद्रदर्शन का समय – 12:39 PM से 08:10 PM, सितंबर 18
अवधि – 07 घंटे 32 मिनट
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय – 09:45 AM से 08:44 PM
अवधि – 10 घण्टे 59 मिनट

Ganesh Chaturthi Kab Hai in 2023

Yearगणेश चतुर्थीअनंत चतुर्दशी
202319 September28 September
माता-पिताशिव और पार्वती
भाई-बहनकार्तिकेय और अशोक सुंदरी।
पत्नीप्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री ऋद्धि और सिद्धि।
पुत्रसिद्धि से ‘क्षेम’
ऋद्धि से ‘लाभ’
इन्हें ही शुभ-लाभ भी कहा जाता है।
प्रियभोग : मोदक, लड्डू
पुष्प : लाल रंग के
वस्तु : दुर्वा (दूब), शमी-पत्र
वाहनमूषक
गणेशजी का दिनबुधवार
गणेशजी की तिथिचतुर्थी
ग्रहाधिपतिकेतु और बुध
गणेशजी के 12 नाम1.         सुमुख
2.         एकदन्त
3.         कपिल
4.         गजकर्णक
5.         लम्बोदर
6.         विकट
7.         विघ्ननाशक
8.         विनायक
9.         धूम्रकेतु
10.       गणाध्यक्ष
11.       भालचन्द्र
12.       विघ्नराज
13.       द्वैमातुर
14.       गणाधिप
15.       हेरम्ब
16.       गजानन।

गणेश जी की पूजा करने से पहले क्या आवशयक है।

  • गणेश जी की पूजा करने के लिए आपका मन पहले साफ़ होना चाहिए किसी भी प्रकार मन में पाप नहीं होना चाइये
  • मंत्रों का जाप करने से पहले अपने आचरण को शुद्ध करें।
  • और गणेश जी की आरती का उच्चारण भी साफ़ तरीके से करे।
  • गणेश जी कहानिया उचित तरीके से सुने।

Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी:

गणेश चतुर्थी पूरे 11 दिनों तक मनाई जाती है। लेकिन 2023 में 12 दिन तक मनाई जायेगी यह चतुर्थी से शुरू होती है जब लोग अपने घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। यह पर्व अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होता है। भगवान गणेश के भक्त भगवान से प्रार्थना करते हैं। वे उसके लिए भक्ति गीत गाते हैं और उसकी स्तुति में विभिन्न मंत्रों का पाठ करते हैं। वे भगवान के पक्ष में आरती करते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है यह तो नीचे दी गयी कहानी को पढ़कर ही समझ में आएगा।
अगली बार जब वह स्नान करने की तैयारी थी तब उन्होंने अपने शरीर पर लगी हल्दी के लेप से हल्दी लिया और उसमे दैवीय शक्ति से उसमे प्राण ढाल दिए जिससे गणेश जी का जन्म हुआ।
उसके बाद जब पार्वती जी स्नान करने जाते समय बोला की किसी को भी द्वार से अंदर प्रवेश ना करने दे तभी भगवान शिवजी आये तो भगवान गणेश जी ने शिवजी को अंदर नहीं जाने दिया इस प्रकार रोकने से शिवजी क्रोधित हो गए और उन्होंने गणो को गणेश को वहां से हटाने का आदेश दिया लेकिन सभी असफल रहे। तभी शिवजी को युद्ध के लिए ललकार ओर शिव जी क्रोधित हो गए और रोष में आकर अपने त्रिशूल से गणेश का सिर काट दिया।
पार्वती जी मृत गणेश को देखकर इतना क्रोधित हुई कि उन्होंने पूरी सृष्टि को नष्ट करने का फैसला किया। शिवजी ने माता का रौद्र रूप देखकर सभी भगवान् ने उनसे शांत होने की विनती की लेकिन माता पार्वती तभी मानी जब उन्होंने गणेश जी वापस जीवित करने का आश्वाशन दिया।
शिवजी ने अपने गणों को आदेश दिया की वह उत्तर दिशा में जाये और जो भी पहला प्राणी मिले उसका सिर लेकर आये, गण जल्द ही एक हाथी का सिर लेकर लौटे शिवजी ने ब्रह्माजी को आदेश दिया कि जिसे गणेश के शरीर पर रखकर शिवजी ने गणेश जी को पुनर्जीवित कर दिया। और तभी भगवान शिवजी और अन्य देवगणो ने उन्हे शक्तियाँ और आशीर्वाद प्रदान किया। और इस दिन को गणेश चतुर्थी रूप में मनाया जाता है

गणेश जी के विवाह की कथा:

गणेश जी का विवाह की कहानी भी बहुत ही दिलचस्प है क्योकि गणेश जी से शादी करने के लिए कोई भी लड़की तैयार नहीं थी। क्योकि एक तो उनके सिर हाथी का था और उनकी सवारी मूषक था। इसलिए जब किसी देवता का विवाह होता था तो इस बात पर मूषक नाराज होता और  विवाह मंडप के नीचे की जमीन खोखला कर सुरंग बना देता और कोई विघ्न उत्तपन्न करता रहता।
इस कारण सभी देवता परेशान होकर शिवजी के पास गए और शिवजी ने उन्हें यह कहकर ब्रह्माजी के पास भेज दिया कि इसका समाधान वही करेंगे। देवताओ के अनुरोध पर इस समस्या का समाधान करने के लिए, ब्रह्माजी ने ऋद्धि (धन और समृद्धि) और सिद्धि (बौद्धिक और आध्यात्मिक शक्तियां) नामक दो सुंदर देवियों का योगबल के द्वारा निर्माण किया। और गणेश जी का विवाह करवाया।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि: (Ganesh Chaturthi Puja Vidhi)

  1. गणेश चतुर्थी पूजा के लिए आवश्यकता होती है- सबसे पहले घी, दूध, दही, चीनी व शहद को मिलाकर बनाये हुए पंचामृत से उन्हें स्नान कराकर वस्त्र, जनेऊ के बाद रोली-चंदन व पुष्प अर्पित किया जाता है| इसके बाद भोग की वस्तुएँ फल, नारियल सीता फल व मिठाई को चढाई किया जाता है।
  2. फिर धुप, दीया और अगरबत्ती को भगवान् के सामने जलाकर भगवान गणेश की स्तुति करके उनका आवाहन किया जाता है और उनको प्रत्यक्षः उपस्थित मानकर प्रार्थना की जाती है। और भगवान गणेश को समर्पित मंत्र, भजन व आरती पढ़ी जाती है।
  3. अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर “ओम गं गणपतये नम:” 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए।

Shri Ganesh Puja Mantra – गणेश चतुर्थी पूजा मंत्र:

गणेश गायत्री मंत्र –

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

Shri Ganesh Puja Mantra “Om Gan Ganpataye Namo Namah”

श्री गणेश मंत्र
ऊँ गं गणपतये नमो नमः,
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः,
अष्टविनायक नमो नमः,
गणपति बाप्पा मोरया ||
ऊँ गं गणपतये नमो नमः,
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः,
अष्टविनायक नमो नमः,
मंगल मूर्ति मोरया ||

How do you do pillayar Chaturthi pooja?

Take some turmeric powder and shape it into a small cone, representing Lord Ganesh.
Apply a small kumkum dot (vermilion) on the cone as an auspicious mark.
Prepare a small bowl of Panchamirtham, a sweet mixture typically made with bananas, jaggery, ghee, and other ingredients.
Place a spoonful of honey in a separate bowl.
If you are using a Kalash (a ceremonial pot), ensure it is firmly placed on a Copper or Silver plate.
Spread some rice on the plate beneath the Kalash.
On top of the Kalash, place a coconut.

What is date of ganpati 2023?

Ganesh Chaturthi in 2023 falls on September 19th. The auspicious timing for the celebration starts at 12:39 PM on September 18th and continues until 1:43 PM on September 19th, during the bright half of the Bhadrapada month.

What are the 4 main rituals of Ganesha Chaturthi?

Avahana or Pran Pratishtha: Sanctifying Lord Ganesha’s idol with rituals and mantras before placing it in the pandal, temple, or home.
Shodashopachara: A 16-fold worship ritual involving bathing the idol with various substances, offering flowers, rice, vermilion, and sandalwood paste.
Uttarpuja: A farewell ritual performed during ‘visarjan’ on the 10th day of the festival.
Ganpati Visarjan: The final ritual where the Ganesha idol is immersed in water, accompanied by chants and well-wishes for the next year. Ganesh Pooja is a sacred devotion to seek Lord Ganesh’s blessings and protection.

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